मैनपुरी : आज उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी बात होने वाली है, जी हां कभी एक दूसरे के धुर विरोधी रहे सपा संरक्षक और बसपा सुप्रीमो मायावती एक साथ मंच साझा करने वाले हैं और मायावती मुलायम सिंह यादव वे लिए वोट मांगने वाली हैं। ‘गेस्ट हाउस कांड’ के बाद से मायावती ने सपा से किनारा कर लिया था, लेकिन उत्तर प्रदेश में बसपा को वापस जीवित करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से च्युत करने के लिए मायावती ने अपने जीवन की उस दुर्घटना को भुलाकर अखिलेश यादव का न्यौता स्वीकारा है और आज सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं।

इसी क्रम में आज सपा-बसपा की साझा रैली मैनपुरी में हो रही है, जिसमें मायावती और मुलायम सिंह उपस्थित रहेंगे। गौरतलब है कि मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से सपा उम्मीदवार हैं, तो मायावती उनके लिए वोट मांगेंगी। दलित और पिछड़े को साथ लाने की कोशिशदलित वोटर मायावती के साथ अब भी खड़े हैं और यादव एवं मुसलमान वोटर सपा के साथ। ऐसे में सपा-बसपा की यह कोशिश है कि वे दलित-पिछड़ा वोट को एकसाथ करके भाजपा को कड़ी चुनौती दें, ताकि उनका उत्तर प्रदेश में ‘क्लीनस्वीप’ का सपना टूट जाये।

जानें क्या है गेस्ट हाउस कांड
वर्ष 1993 में सपा-बसपा के गठबंधन के बाद प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार बनी थी। उस वक्त बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद राजनीति में ध्रुवीकरण चरम पर था, ऐसे में सपा-बसपा का गंठबंधन हुआ और मायावती के समर्थन से सरकार बनी थी। चूंकि किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं था, इसलिए जब कुछ मनमुटाव के बाद मायावती ने अपना समर्थन सरकार से वापस ले लिया, तो मुलायम सिंह यादव की सरकार गिर गयी। दो जून 1995 को मायावती ने अपना समर्थन वापस लिया था। जिसके बाद सपा के नाराज कार्यकर्ताओं ने मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस पर हमला कर दिया था जिसमें मायावती ठहरी हुईं थीं। उन्मादी भीड़ समर्थन वापस लेने की घटना से नाराज थी और वे मायावती को सबक सिखाना चाहते थे। भीड़ गेस्ट हाउस में घुस आयी और मायावती पर हमला कर दिया। जानकार बताते हैं कि उस वक्त भीड़ ने ना सिर्फ मायावती के साथ मारपीट की बल्कि उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया था। यहां तक कि उनके कपड़े भी फाड़ दिये गये थे। मायावती के जीवन पर लिखी गयी किताब ‘ बहनजी’ में इस घटना का विस्तृत विवरण है। बताया जाता है कि मायावती ने भीड़ से खुद को बचाने के लिए कमरे में बंद हो गयीं थीं, लेकिन दरवाजा तोड़ दिया गया था और उनके साथ बदसूलकी की गयी थी। उस वक्त भाजपा नेता लालजी टंडन किसी तरह उन्हें वहां से बचाकर ले गये थे जिसके बाद मायावती ने उन्हें राखी बांधना शुरू कर दिया था। कहा तो यह भी जाता है कि इस घटना के बाद मायावती ने साड़ी पहनना छोड़ दिया और सलवार कुर्ता पहनने लगीं। इस घटना के लिए मायावती ने मुलायम सिंह को जिम्मेदार ठहराया था। उस वक्त काफी निचले दर्जे की टिप्पणी भी मायावती पर की गयी थी। बाद में कई बार यह कोशिश की गयी कि सपा-बसपा साथ आयें, लेकिन यह संभव हो ना सका, क्योंकि मायावती ने कहा कि वह सपा के साथ एक ही शर्त पर जा सकती हैं कि मुलायम सिंह यादव उनसे सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें। लेकिन इस बात को मुलायम सिंह यादव ने कभी ना तो स्वीकारा और ना माफी मांगी।