रांची : झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने सोमवार को रांची कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रांची की निचली अदालत में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। 12 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई की थी। सुनवाई के बाद जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ ने श्री साव से कहा था कि वे सोमवार तक सरेंडर कर दें।

इससे पहले, झारखंड सरकार के वकील तपेश कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि योगेंद्र साव के खिलाफ चल रहे सभी 18 मामले, जिसमें बरकागांव का केस भी शामिल है, के रिकॉर्ड हजारीबाग से रांची की कोर्ट में ट्रांसफर हो गये हैं।

ज्ञात हो कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने 4 अप्रैल को जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने की वजह से प्रदेश के पूर्व मंत्री की जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद योगेंद्र साव ने शीर्ष अदालत में एक अर्जी दाखिल कर मांग की कि जब तक हजारीबाग से उनके मामले रांची ट्रांसफर नहीं हो जाते, तब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाये।

साथ ही योगेंद्र साव ने कोर्ट से यह भी बताने के लिए कहा था कि उन्हें कहां सरेंडर करना है. इतना ही नहीं, योगेंद्र साव ने कोर्ट से अपील की थी कि उनके खिलाफ चल रहे सभी मामलों का स्पीडी ट्रायल कराया जाये.
उल्लेखनीय है कि योगेंद्र साव वर्ष 2013 में हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार में मंत्री थे। उनके खिलाफ डेढ़ दर्जन मामले लंबित हैं। इसमें दंगा और हिंसा के लिए लोगों को उकसाने के आरोप भी शामिल हैं। उनकी पत्नी के खिलाफ भी हजारीबाग कोर्ट में केस चल रहा है।

16 महीने जेल से बाहर रहे योगेंद्र साव
योगेंद्र साव 16 महीने जमानत पर जेल से बाहर रहे। योगेंद्र और उनकी विधायक पत्नी निर्मला देवी को 15 दिसंबर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त जमानत दी थी। कोर्ट ने कहा था कि वह जमानत अवधि में झारखंड नहीं जायेंगे और पति-पत्नी दोनों मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ही रहेंगे। भोपाल के पुलिस अधीक्षक को सूचित करने के बाद उन्हें पुलिस सुरक्षा में अदालती सुनवाई के लिए झारखंड जाने की अनुमति दी गयी थी। शीर्ष अदालत ने साव के बारे में पहले कहा था कि भोपाल के स्थानीय अधिकारियों की अनदेखी कर साव ने अदालत के निर्देशों की अनदेखी की, जो जमानत शर्तों का खुला उल्‍लंघन है। इसलिए उनकी जमानत रद्द की जाती है।