पटना : पहले चरण के मतदान के दौरान छह बूथों पर मतदाताओं द्वारा वोट का बहिष्कार किया गया। अब इन बूथों पर दोबारा चुनाव नहीं कराया जायेगा। इसके साथ ही राज्य में कहीं से भी दोबारा मतदान कराने की सूचना नहीं है। औरंगाबाद, गया, नवादा और जमुई लोकसभा क्षेत्रों में मतदान के बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एचआर श्रीनिवास ने प्रेस काॅन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में पहले चरण का मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया है।

मतदान के दौरान 75 हथियार, 81 कारतूस और छह बम बरामद किये गये। दहशत फैलाने के असामाजिक तत्वों द्वारा नकली बम को प्लांट किया गया था। किसी में बारूद नहीं पाया गया। नवादा के शिशुआ में बूथ कैप्चरिंग की कोशिश के बाद हवाई फायरिंग की गयी। यहां बूथ पर करीब 200 लोगों ने बूथ को घेरने और इवीएम को छेड़छाड़ करने की कोशिश की। इसमें प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गयी और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मॉकपोल के दौरान कुल 76 कंट्रोल यूनिट, 86 बैलेट युनिट और 108 वीवीपैट को बदलना पड़ा। मतदान शुरू होने के बाद 33 कंट्रोल यूनिट, 34 बैलेट यूनिट और 54 वीवीपैट बदला गया।

उन्होंने बताया कि गया लोकसभा क्षेत्र के शेरघाटी विधानसभा के बूथ संख्या 89, बोधगया के बूथ संख्या 89, वजीरगंज के बूथ संख्या 263 व 264 और जमुई लोकसभा के सिकंदरा विधानसभा में बूथ संख्या 129 और 130 पर वोट का बहिष्कार किया गया। यहां के मतदाताओं को समझाने की कोशिश की गयी।

अब इन छह बूथों पर दोबारा मतदान नहीं कराया जायेगा। उन्होंने बताया कि नवादा के गोविंदपुर विधानसभा के कौकाकोल के केवानी स्थित बूथ संख्या 215 पर असामाजिक तत्वों द्वारा इवीएम लूटने की कोशिश की गयी। और कंट्रोल यूनिट को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया गया। थोड़ी बाधा के बाद यहां पर मतदान का काम पूरा हुआ। इसी तरह से शेखपुरा जिला के बहमतपुर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हवाई फायरिंग की गयी।

इस अवसर पर उपस्थित एडीजी हेडक्वार्टर कुंदन कृष्णनन ने बताया कि मतदान के दौरान 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें नवादा से 44 लोगों को जबकि जमुई से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। मतदान के दौरान 89 लाख नकद बरामद किये गये हैं।
इसमें 48 लाख रुपये आयकर को सौंप कर जांच करने को कहा गया है। साथ ही आठ हजार लीटर शराब भी जब्त की गयी हैै इस मौके पर अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजय कुमार सिंह, बालामुरुगन डी, उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विवेकानंद झा, बैजूनाथ कुमार सिंह, सुधाकर प्रसाद, उप निर्वाचन पदाधिकारी अशोक प्रियदर्शी, मनोज कुमार सिंह सहित चुनाव कार्य में जुटे अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

पहले चरण के चार लोकसभा क्षेत्रों के 15 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान दिन के चार बजे तक कराया गया। जबकि, चार लोकसभा क्षेत्रों के शेष विधानसभा क्षेत्रों में मतदान शाम छह बजे तक संपन्न हुआ।

जिन विधानसभा क्षेत्रों में मतदान सुबह सात बजे से चार बजे तक कराया गया उसमें औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र में कुटुंबा, रफीगंज, गुरुआ, इमामगंज, टिकारी में मतदान सुबह सात बजे से दोपहर चार बजे तक कराया गयौ इसी तरह से गया लोकसभा क्षेत्र में शेरघाटी, बाराचट्टी, बोधगया विधानसभा में चार बजे तक मतदान संपन्न हुआ। नवादा लोकसभा क्षेत्र के रजौली और गोविंदपुर में मतदान दोपहर चार बजे तक कराया गया।

जमुई लोकसभा क्षेत्र के सिंकंदरा, जमुई, झाझा, चकाई और तारापुर विधानसभा क्षेत्र में मतदान सुबह सात बजे से दोपहर चार बजे तक कराया गया। पहले चरण की चार लोकसभा क्षेत्र के कुल 44 प्रत्याशियों का किस्मत इवीएम में कैद हो गया। उन्होंने बताया कि पहले चरण में गया लोकसभा क्षेत्र में कुल 13 प्रत्याशी, नवादा में 13 प्रत्याशी, औरंगाबाद में नौ और जमुई लोकसभा क्षेत्र में नौ प्रत्याशी मैदान में हैं।

चुनाव को लेकर सभी जेलों में सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्देश

लोकसभा चुनाव में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तमाम मापदंडों को कसने के लिए जेल पर भी खासतौर से फोकस किया जा रहा है। राज्य की सभी 57 जेलों में सुरक्षा ऑडिट कराने के लिए कहा गया है। इससे संबंधित आदेश जेल आइजी मिथिलेश मिश्रा ने सभी जिलों के डीएम और एसपी को भेजा है। इसके अनुसार प्रत्येक केंद्रीय, मंडल और उपकारा की सुरक्षा व्यवस्था की डीएम और एसपी संयुक्त रूप से समीक्षा करें।

जिस जेल में जिस क्रम में सुरक्षा की जरूरत महसूस हो, वहां इसे तुरंत मुहैया करायी जाये। जेल की अच्छी तरह से चेकिंग कर देखा जाये कि अंदर किसी तरह की प्रतिबंधित सामग्री मौजूद नहीं हो। किसी जेल में कोई प्रतिबंधित सामग्री मिलती है, तो कारा कर्मी की भूमिका की भी इसमें जांच की जाये। दोषी पाये जाने वाले कर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाये। जेलों में मोबाइल फोन के प्रयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाये। इसके लिए नियमित चेकिंग करने की जरूरत है।

यह देखा गया है कि जेल के अंदर से अपराधी मोबाइल की मदद से अपना नेटवर्क संचालित करते रहते हैं। इसे रोकने की पूरी कोशिश हो। कैदियों खासकर नक्सली या माओवादी की पेशी के दौरान विशेष तौर पर सतर्कता बरती जाये। जेल के बाहर गश्ती और औचक सुरक्षा जांच की भी व्यवस्था की जाये। जिन जेलों में ज्यादा संख्या में नक्सली या उग्रवादी बंद हैं, तो ऐसे संवेदनशील जेलों की सुरक्षा व्यवस्था पर खासतौर से सतर्कता बरती जाये। इसमें यह भी कहा गया है कि कई संवेदनशील जेलों में पदाधिकारियों की कमी की वजह से जिला प्रशासन ने सीनियर एडीएम की प्रतिनियुक्ति कर दी है।

ऐसे जेलों में उन्हीं पदाधिकारियों की तैनाती की जाये, जो नियमित रूप से इन पदों पर काम कर सकें। जेलों में लंबे समय से तैनात कर्मियों का ट्रांसफर करने के लिए भी कहा गया है।