पटना : लोकसभा चुनाव के पहले चरण के तहत बिहार के औरंगाबाद, जमुई, नवादा और गया लोकसभा क्षेत्रों में गुरुवार को सुबह सात बजे मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके लिए बूथों पर छह बजे से ही ईवीएम की मॉक टेस्टिंग की गयी। वहीं, बिहार के औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र में गया जिले के डुमरिया प्रखंड में अनरवन सलैया बूथ नंबर नौ पर आइइडी लगे होने की सूचना है। पोलिंग पार्टी को बूथ से दूर रखकर पुलिस बूथ को अपने घेरे में रख कर रखे गये वस्तु के जांच में जुट गयी है।

बिहार के इन चार सीटों पर कुल 44 प्रत्याशी मैदान में हैं। मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच है। एनडीए में बीजेपी, जेडीयू और एलजेपी है। वहीं, महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, वीआईपी और आरएलएसपी है।

औरंगाबाद लोकसभा सीट
महागठबंधन की तरफ से इस सीट पर हम पार्टी के उपेंद्र प्रसाद चुनावी मैदान में हैं। वहीं, एनडीए की तरफ से बीजेपी के सुशील कुमार सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के सुशील कुमार सिंह ने इस सीट पर कब्जा किया था। औरंगाबाद लोकसभा सीट के तहत वोटरों की कुल संख्या 7.37 लाख है। कुल नौ उम्मीदवार मैदान में हैं और सभी पुरुष हैं।

नवादा लोकसभा सीट
नवादा लोकसभा सीट पर इस बार एनडीए की तरफ से एलजेपी के चंदन कुमार मैदान में हैं। वहीं, महागठबंधन की तरफ से आरजेडी की विभा देवी उम्मीदवार हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी के गिरिराज सिंह ने कब्जा जमाया था. यहां वोटरी की कुल संख्या 18.92 लाख है। कुल 13 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसमें 11 पुरुष और दो महिला उम्मीदवार हैं।
गया लोकसभा सीट (आरक्षित सीट)
गया लोकसभा सीट पर महागठबंधन ने हम पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को उतारा है। वहीं, एनडीए की तरफ से जेडीयू के विजय कुमार मांझी मैदान में हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के हरि मांझी ने यहां चुनाव जीता था। गया में वोटरों की कुल संख्या 16.99 लाख है. कुल 13 उम्मीदवार मैदान में हैं और सभी पुरुष उम्मीदवार हैं।

जमुई लोकसभा सीट (आरक्षित सीट)
जमुई लोकसभा सीट पर एनडीए की तरफ से एलजेपी के मौजूदा सांसद चिराग पासवान एक बार फिर किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, महागठबंधन की तरफ से इस सीट पर आरएलएसपी के भूदेव चौधरी मैदान में हैं। यहां वोटरों की कुल संख्या 17.09 लाख है। कुल नौ उम्मीदवार मैदान में हैं जिसमें एक महिला उम्मीदवार हैं।

गया लोकसभा सीट (आरक्षित)
गया लोकसभा सीट (आरक्षित) हमेशा से पार्टियों के लिए विशेष रही है। सीट आरक्षित होने के बाद पहली बार 1967 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के रामधनी दास यहां के सांसद बने। लेकिन, पिछले 20 साल से इस पर मांझियों का कब्जा है।

1999 में बीजेपी के रामजी मांझी
2004 में आरजेडी के राजेश कुमार मांझी
2009 व 2014 में बीजेपी के हरि मांझी यहां से सांसद हैं।
17 लाख वोटर वाली इस सीट पर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मांझी समाज के लोग निभाते हैं। गया लोकसभा में मांझी समाज की संख्या ढाई लाख है। वहीं एससी/एसटी की कुल संख्या पांच लाख के करीब है। जिसमें मांझी, पासवान, पासी, धोबी आते हैं। अल्पसंख्यकों की संख्या यहां एक लाख 80 हजार, भूमिहार व राजपूतों की संख्या ढाई लाख, यादव ढाई लाख और वैश्यों की संख्या दो लाख के करीब है। गया में नक्सली गतिविधियों के बाद भी वोटिंग फीसदी पूरे देश में औसत के बराबर ही रहती है। वर्ष 1998, 1999 और 2004 में यहां क्रमश: 67.25, 61.33 और 61.51 फीसदी वोटिंग हुई. इसके बाद वर्ष 2009 में वोटिंग का प्रतिशत घट गया और इस वर्ष मात्र 42.45 फीसदी वोटिंग हुई। हालांकि, वर्ष 2014 में यह बढ़कर 53.92 फीसदी तक पहुंचा।
वर्तमान सांसद : पहले विधायक फिर सांसद बने हरि मांझी। गया से सांसद हरि मांझी पिछले दो बार से सांसद हैं। 2005 में बीजेपी के टिकट पर बोधगया से विधायक बनने से पहले उन्होंने पार्टी में संगठन का काम देखा। पार्टी के संगठन का काम करते हुए उन्होंने टिकट के लिए अपनी दावेदारी पेश की। 2009 में उन्होंने आरजेडी के रामजी मांझी को 62, 453 वोटों से और 2014 में आरजेडी के रामजी मांझी को 115504 वोटों से हराया।
कौन जीते कौन हारे
2014
जीते : हरि मांझी, बीजेपी, 326230
हारे : रामजी मांझी, आरजेडी, 210726
2009
जीते : हरि मांझी, बीजेपी 246255
हारे : रामजी मांझी, आरजेडी 183802
2004
जीते :राजेश मांझी, आरजेडी 464829
हारे : बलबीर चांद, बीजेपी 361895
1999
जीते : रामजी मांझी: बीजेपी: 319530
हारे : राजेश कुमार: आरजेडी: 298747
कुल मतदाता 16,98,772
पुरुष मतदाता 87,93,08
महिला मतदाता 81,94,05
थर्ड जेंडर 49
1772 मतदान केंद्र

औरंगाबाद लोकसभा सीट
औरंगाबाद लोकसभा सीट को राजपूत बहुल सीट माना जाता है। बिहार के पहले उपमुख्यमंत्री डॉ अनुग्रह नारायण सिन्हा और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिंह औरंगाबाद से आते हैं। उनके परिवार का औरंगाबाद लोकसभा सीट पर दबदबा माना जाता है। निखिल कुमार और उनकी पत्नी श्यामा सिंह भी कांग्रेस की ओर से यहां से सांसद चुने गये। निखिल कुमार राज्यपाल भी बने। राजपूत बहुल औरंगाबाद को बिहार का चित्तौड़गढ़ कहा जाता है। 1952 के पहले चुनाव से अबतक यहां से सिर्फ राजपूत उम्मीदवार ही चुनाव जीते हैं।
औरंगाबाद संसदीय सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट मानी जाती है और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिंह और उनके परिवार का इस सीट पर दबदबा माना जाता है। आजादी के बाद 1952 के पहले चुनाव में यहां से सत्येंद्र नारायण सिंह जीतकर लोकसभा पहुंचे. उन्होंने इस सीट से 7 बार लोकसभा चुनाव जीता। उनके परिवार से 1999 में कांग्रेस की श्यामा सिंह, फिर 2004 में निखिल कुमार जीते। तीन चुनावों में ये सीट जनता दल के हाथ में गई। 1998 में समता पार्टी के सुशील कुमार सिंह इस सीट से जीतने में कामयाब रहे। 2009 के चुनाव में सुशील कुमार सिंह ने जदयू और 2014 में भाजपा के टिकट पर इस सीट से जीत हासिल की।
औरंगाबाद संसदीय क्षेत्र के तहत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं- कुटुम्बा, औरंगाबाद, रफीगंज, गुरुआ, इमामगंज और टिकारी. इनमें से दो सीटें कुटुम्बा और इमामगंज रिजर्व सीटें हैं। 2015 के बिहार विधानसभा चुनावों में इन 6 सीटों में से दो कांग्रेस, दो जदयू 1 बीजेपी और एक सीट हम के खाते में गयी। हम के नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी इमामगंज सीट से विधायक चुने गये।

16वीं लोकसभा के लिए 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट से भाजपा के सुशील कुमार सिंह जीते। वे जदयू से बीजेपी में आये थे। सुशील कुमार सिंह को 307941 वोट मिले और उन्होंने कांग्रेस के निखिल कुमार को हराया। निखिल कुमार को 241594 वोट मिलें। जदयू के बागी कुमार वर्मा 136137 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।

नवादा लोकसभा सीट
नवादा लोक सभा क्षेत्र पहले कांग्रेस और फिर सीपीआईएम का गढ़ माना जाता था। लेकिन, 1996 के लोक सभा चुनाव में भाजपा ने यहां सेंध लगायी। इस चुनाव में भाजपा के कामेश्वर पासवान ने सीपीआईएम के प्रेमचंद राम को करारी मात दी। उन्होंने करीब 97 ह जार वोटों से हराकर नवादा में पहली बार कमल खिलाया। हालांकि दो साल बाद ही 1998 में लोक सभा चुनाव हुआ, जिसमें भाजपा ने अपनी सीट गंवा दीं। राजद की मालती देवी ने करीब 14 हजार वोटों से कामेश्वर पासवान को हरा पहली बार नवादा लोकसभा में राजद का खाता खोला। बता दें कि 1957 से पहले नवादा गया पूर्वी संसदीय सीट का हिस्सा था। जिले के हिसुआ प्रखंड स्थित मंझवे निवासी सत्यभामा देवी व रामधनी दास संयुक्त रूप से पहले सांसद निर्वाचित हुए। दोनों कांग्रेस के ही सिपाही थे। 1957 में नये परिसीमन के तहत संसदीय क्षेत्र संख्या- 34 के रूप में नवादा लोकसभा क्षेत्र का गठन हुआ।

दस साल से यह सीट भाजपा के खाते में है। सामान्य सीट होने के बाद 2009 में डॉ. भोला सिंह ने भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। उनके बाद जीत को निरंतरता देते हुए मोदी लहर में 2014 में गिरिराज सिंह ने इस सीट पर कब्जा जमाया। इससे पहले कामेश्वर पासवान ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर 1996, मालती देवी ने राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर 1998 एवं संजय पासवान ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर 1999 में जबकि वीरचंद्र पासवान ने राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर 2004 में परचम लहराया था। इसके बाद 2009 के परिसीमन में इसका क्रमांक संसदीय सीट संख्या- 39 हो गया और इसे सामान्य सीट में बदल दिया गया।

कांग्रेस ने जीता था पहला चुनाव
1962 में यह संसदीय क्षेत्र संख्या- 42 (सुरक्षित) हो गया। रामधनी दास इस चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस की टिकट पर सांसद चुने ग्ये। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी जेएस के अकलू मांझी को करीब 71 हजार वोटों से करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद एमएसपीएन पुरी ने निर्दलीय के रूप में 1967, सुखदेव प्रसाद वर्मा ने भार तीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर 1971, सूर्य नारायण सिंह ने भारतीय लोकदल के टिकट पर 1977, कुंवर राम ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर 1980 और 1984 जबकि प्रेम प्रदीप ने भार तीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के टिकट पर 1989 में जीत दर्ज की थी। बता दें कि कांग्रेस के कुंवर राम के बाद कोई भी सांसद लगातार दो बार चुनाव नहीं जीत पाया।
कौन जीते कौन हारे
2014
गिरिराज सिंह भाजपा 390,248
राज बल्लभ प्रसाद राजद 250,091
2009
भोला सिंह भाजपा 130,608
वीणा देवी लोजपा 95,691
2004
वीर चंद्र पासवान राजद 489,992
संजय पासवान भाजपा 433,986
1999
संजय पासवान भाजपा 453,943
विजय चौधरी राजद 369,858
कुल मतदाता 16,56,152
पुरुष मतदाता 8,63,936
महिला मतदाता 7,92,133

थर्ड जेंडर 83
जमुई लोकसभा सीट
जमुई लोकसभा हाईप्रोफाइल सीट है। लगभग साढ़े 15 लाख मतदाता वाली इस सीट पर 2014 की लड़ाई लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) सुप्रीमो रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने जीती थी। 2014 में चिराग पासवान के खाते में कुल 2,85,354 और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) उम्मीदवार सुधांशु शेखर के खाते में कुल 1,99,407 वोट पड़े थे। यह चुनाव जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) अपने दम पर लड़ रही थी। उदय नारायण चौधरी चुनाव मैदान में थे। उन्हें कुल 1,98,599 मत मिले थे और वह तीसरे स्थान पर रहे थे।
जमुई में सबसे अधिक यादव मतदाता हैं। उनकी संख्या तीन लाख के करीब है। इसके बाद राजपूतों की संख्या है। इनकी आबादी लगभग दो लाख है। इसके अलावा वैश्य दो लाख, भूमिहार एक लाख, मुस्लिम डेढ़ लाख, पासवान एक लाख, ब्राह्मण 50 हजार, कायस्थ 30 हजार और रविदास की संख्या 80 हजार के करीब है। नये परिसीमन के बाद जमुई सुरक्षित संसदीय सीट बनी थी। जमुई लोकसभा में मुंगेर, शेखपुरा जिले के क्षेत्र भी शामिल हैं। साथ ही विधानसभा की कुल 6 सीटें आती हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव के मुताबिक, तीन सीटों पर एनडीए और तीन पर महागठबंधन का कब्जा है। 1952 में कांग्रेस के बनारसी प्रसाद सिन्हा चुने गये थे। 1962 और 1967 के चुनाव में भी कांग्रेस का ही कब्जा रहा। 1971 में CPI के भोला मांझी ने चुनाव जीता। 2009 के चुनाव में जदयू के भूदेव चौधरी को सफलता मिली।

लोजपा मुखिया रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान बिहार में तेजी से उभरते युवा राजनेताओं में शामिल हैं। लोजपा के साथ-साथ एनडीए गठबंधन में भी सक्रिय हैं। फिल्मों से नाता तोड़कर उन्होंने राजनीति का रुख किया था। पिता की वजह से आसानी से लॉंचिंग पैड मिल गया। चिराग लोजपा के संसदीय कमेटी के प्रमुख भी हैं। 2019 में जमुई से दोबारा दांव आजमा रहे हैं।

भूदेव चौधरी का सियासी सफरनामा
रालोसपा उम्मीदवार 2009 में जमुई से जदयू की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़े थे। उन्होंने राजद के श्याम रजक को हराया था। इस चुनाव में वह जदयू छोड़कर रालोसपा में शामिल हो गये। उन्हें प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया गया। इस चुनाव में वह राजद की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।