नई दिल्ली : चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए खारिज कर दी इससे पहले सीबीआई ने लोकसभा चुनावों के मद्देनजर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करते हुए लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका का विरोध किया था। जांच ब्यूरो ने 39 पन्नों के अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल लेकर जमानत का ‘गलत’ इस्तेमाल कर सकते हैं।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षतावाली पीठ से लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर जवाब दाखिल करने की अनुमति मांगी थी। जांच ब्यूरो ने कहा था कि राजद प्रमुख आसन्न लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं और अपनी जमानत का दुरूपयोग कर सकते हैं। साथ ही कहा था कि लालू प्रसाद यादव आठ महीने से ज्यादा समय से अस्पताल के वार्ड में हैं और राजनीतिक गतिविधियों में संलिप्त हो रहे हैं।

सीबीआई ने कहा है, ”याचिकाकर्ता (यादव) जिस अवधि में अस्पताल में रहे हैं, उन्हें ना सिर्फ सभी सुविधाओं से युक्त विशेष वार्ड की अनुमति दी गयी, बल्कि वह वहां से आभासी तरीके से अपनी राजनीतिक गतिविधियां चला रहे हैं। यह उनके मुलाकातियों की सूची से स्पष्ट है।” एजेंसी ने कहा कि यादव दावा करते हैं कि वह इतने बीमार हैं कि जेल में नहीं रह सकते, लेकिन अचानक वह जमानत पाने के लिए स्वस्थ हो गये हैं। लालू प्रसाद को नौ सौ करोड़ रुपये से अधिक के चारा घोटाले से संबंधित तीन मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। ये मामले 1990 के दशक में, जब झारखंड बिहार का हिस्सा था, धोखे से पशुपालन विभाग के खजाने से धन निकालने से संबंधित है।
मालूम हो कि रांची में बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में बंद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा 10 जनवरी को जमानत याचिका खारिज करने के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने अधिक उम्र और बीमारी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की है। उन्होंने बताया है कि उनकी उम्र 71 साल हो चुकी है।