नई दिल्ली: वैश्विक आबादी रूझानों पर यूएन के अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि भारत 2022 तक चीन को पछाड़ते हुए दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। खाने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी तो ऐसे में भारत में खाद्यानों की कुल पैदावार बढ़ाने की भी आवश्यकता होगी। कृषि सिर्फ बढ़ती आबादी की जरूरतों को ही पूरा नहीं करती है, बल्कि पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित फसल सुरक्षा एवं फसल स्वास्थ्य समाधानों को सुनिश्चित कर पोषण की आवश्यकता को भी पूरा करती है। ये बातें क्राॅपलाइफ इंडिया के वाइस चेयरमैन डॉ. के.सी. रवि ने फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स और इंडस्ट्री (फिक्की), क्रॉपलाइफ इंडिया और एसीएफआई के साथ मिलकर गुणवत्तापूर्ण फसल सुरक्षा उत्पाद और किसानों के समक्ष आ रही चुनौतियां को लेकर किए गए राउंडटेबल डिस्कशन के मौके पर कही। इसमें कृषि रसायन उद्योग के अधिकारियों एवं प्रमुखों, शिक्षणविदों, टेक्नोक्रेट, काॅर्पोरेट्स, नीति निर्माताओं के अलावा किसानों और वैज्ञानिकों ने शिरकत की।

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वहीं इस मौके पर धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के चेयरमैन आर. जी. अग्रवाल ने कहा कि देश में निम्न गुणवत्ता के कृषिरसायन उत्पादों में अचानक काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे फसलों के साथ-साथ किसानों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। कृषि रसायन कृषि पैदावार को बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं, इसलिए हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि किसान इन गुण्वत्तापूर्ण उत्पादों का इस्तेमाल आसानी से कर पाएं। उन्होंने कहा कि यह खुशी कि बात है कि दुनिया में सबसे कम कीटनाशकों का प्रयोग करने वाले अमेरिका को पीछे छोड़कर चीन के बाद भारत अब दूसरे स्थान पर है। उन्होंने यह भी बताया कि कृषि से चीन की जीडीपी हमारे देश की तुलना में 3 गुणा अधिक है, जबकि हमारे पास 142 मिलियन हेक्टेअर कृषि भूमि है और हमारे देश में बारिश 1000एमएम से अधिक होती है। जबकि चीन के पास 128 मिलियन हेक्टेअर कृषि भूमि है और यहां बारिश सिर्फ 600एमएम प्लस है। ऐसे में हमारे पास कृषि की जीडीपी के साथ ही अपने देश की जीडीपी बढ़ाने के लिए खेती में अपार सामर्थ्य है।

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डॉ. के.सी. रवि ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण फसल सुरक्षा उत्पाद किसानों की जीवनरेखा हैं। विभिन्न बायोटिक एवं एबायोटिक तनावों के कारण खेती करना पहले ही कठिन है और सूखा, बाढ़ एवं अलनिनो के क्रूर चक्र से किसानों की जिंदगी और कठिन होती जा रही है। फसल सुरक्षा उत्पाद खरपतवार, रोग एवं कीटों के दबाव को नियंत्रित कर फसल को नुकसान से बचाते हैं। 20वीं सदी के मध्य से नये एवं अधिक प्रभावी उत्पादों के व्यापक इस्तेमाल ने खाद्य सुरक्षा को बढ़ाया है और दुनिया भर में रहनसहन के स्तर में सुधार आया है। फसल सुरक्षा उत्पाद लोगों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में भी मदद करते हैं, क्योंकि ये लोगों एवं मवेशियों में रोग फैलाने तथा घरों एवं संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को नियंत्रित करते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है और इसकी बदौलत भारत की लगभग आधी वर्कफोर्स को रोजगार मिला है। यह देश की जीडीपी में लगभग 17 प्रतिशत का योगदान करती है।